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भारतीय शिक्षा समित कानपुर प्रान्त (नगरीय शिक्षा)

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जन शिक्षा समित कानपुर प्रान्त (ग्रामीण शिक्षा)

प्रधानाचार्य समीक्षा व कार्य योजना बैठक 2025 17, 18 व 19 अप्रैल 2025 सरस्वती विद्या मंदिर इण्टर कालेज, दामोदर नगर, कानपुर
प्रधानाचार्य समीक्षा व कार्य योजना बैठक 2025 17, 18 व 19 अप्रैल 2025 सरस्वती विद्या मंदिर इण्टर कालेज, गोविन्द नगर कानपुर

शिक्षा, संस्कार और समर्पण

विद्या भारती - देश का सबसे बड़ा गैर सरकारी शिक्षा संगठन

आज नगरों और ग्रामों में, वनवासी और पर्वतीय क्षेत्रो में झुग्गी-झोपड़ियो में, शिशु वाटिकायें, शिशु मन्दिर, विद्या मन्दिर, सरस्वती विद्यालय, उच्चतर शिक्षा संस्थान, प्रशिक्षण केन्द्र और शोध संस्थान है। इन सरस्वती मन्दिरों की संख्या, विद्यालयों में छात्रो की संख्या और आचार्यो की संख्या निरन्तर बढ़ रही हैं।

इसके फलस्वरूप अभिभावको के साथ तथा हिन्दु समाज में निरन्तर सम्पर्क बढ़ रहा है। हिन्दु समाज के हर क्षेत्र में प्रभाव बढ़ा है। आज विद्या भारती भारत में सबसे बड़ा गैर सरकारी शिक्षा संगठन बन चुका हैं।

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विद्या भारती -

देश का सबसे बड़ा गैर सरकारी शिक्षा संगठन

1.

भारतीय संस्कृति एवं जीवनादर्शों के अनुरूप शिक्षा दर्शन विकसित करना जिससे अनुप्राणित होकर शिक्षा के लिये समर्पित कार्यकर्ता राष्ट्र के पुनर्निमाण के पावन लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में विश्वासपूर्वक बढ़ सकें।

3.

शारीरिक, योग, संगीत, संस्कृत तथा नैतिक एवं अध्यात्मिक शिक्षा के राष्ट्रीय पाठ्यक्रमों, सहपाठ्य क्रियाकलापों एवं अनौपचारिक शिक्षा के आयोजनों से छात्रो में राष्ट्रीय एकता, चारित्रिक एवं सांस्कृतिक विकास को सुदृढ़ करना।

2.

विश्व के आधुनिकतम ज्ञान, विज्ञान एवं तकनीकी उपलब्धियों का पूर्ण उपयोग करते हुए ऐसी शिक्षण प्रणाली एवं संसाधनो को विकसित करना है जिससे छात्रों के सर्वांगीण विकास के शैक्षिक उद्देश्यों एवं लक्ष्यों की प्राप्ति सुलभ हो सके।

4.

शिक्षा का ऐसा स्वरूप विकसित करना जिसके माध्यम से भारत की अमूल्य आध्यात्मिक निधि, परम सत्य के अनुसंधान में पूर्व पुरुषों के अनुभव एवं गौरवशाली परंपराओ की राष्ट्रीय थाती को वर्तमान पीढ़ी को सौंपा जा सके और उसकी समृद्धि में वह अपना योगदान करने में समर्थ हो सके।

॥ माँ शारदे को नमन ॥

सरस्वती वन्दना

या कुन्देन्दु तुषार हार धवला या शुभ्र वस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना | या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥ १ ॥
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं, वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌। हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌, वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥ २ ॥

भारतीय शिक्षा समिति कानपुर प्रान्त

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